कुछ नहीं इसका यहाँ पर, कुछ नहीं इसका वहाँ पर,
कुछ क्षणों का दंभ है जो चढ़ रहा है बस यहाँ पर ,
क्यों स्वयं से प्रश्न अपनी बेबसी का कर रहा है ,
एक तिनका जिन्दगी का क्यों हवा में उड़ रहा है/
geeton ke badal-[4]
गुरुवार, 9 जून 2011
मंगलवार, 7 जून 2011
शनिवार, 4 जून 2011
मंगलवार, 24 मई 2011
सोमवार, 23 मई 2011
जिंदगी के गूढ़ रहस्यों को समझने की कोशिस का नाम है ...'गीतों के बादल' ... . या एक ..प्रेमकाव्यग्रन्थ .. क्योंकि इस काव्यसंग्रह में जीवन भर के अनुभव और प्यार की तरुणाई... से लबरेज शब्दों की मालाएं पिरोई गई हैं .. कहने के लिए यह कविता संग्रह है जो जीवन के अनुभवों पर केंद्रित . कवि की जिंदगी में होने वाली उथल-पुथल और संघर्ष को दर्शाता है . लेकिन मेरी नज़र में यह पूरी जिंदगी की गाथा होने के साथ प्यार के प्रतीक के रूप में अपने प्राणप्रिये को समर्पित सन्देश है . जिसको पढकर लोग अपने निजी जीवन के अनुभवों को महसूस करेंगे और एक-एक लाइन में होने वाले संघर्ष को जीना चाहेंगे . गीतों की लाइने पूरी तरह झकझोर देतीं हैं ..जैसे..-----
------------............ बादलों में, सागरों में ,............. सिर्फ तेरा ही उमड़ना ,........... .. देखने की जिद हमें थी , ......... डूबकर तुझमें उतरना ,
[ श्रवण कुमार शुक्ल ]
------------............ बादलों में, सागरों में ,............. सिर्फ तेरा ही उमड़ना ,........... .. देखने की जिद हमें थी , ......... डूबकर तुझमें उतरना ,
[ श्रवण कुमार शुक्ल ]
शनिवार, 21 मई 2011
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ (Atom)