गुरुवार, 9 जून 2011

कुछ नहीं इसका यहाँ पर, कुछ नहीं इसका वहाँ पर,
कुछ क्षणों का दंभ है जो चढ़ रहा है बस यहाँ पर ,
क्यों स्वयं से प्रश्न अपनी बेबसी का कर रहा है ,
एक तिनका जिन्दगी का क्यों हवा में उड़ रहा है/

मंगलवार, 7 जून 2011

है यहाँ किसकी हुकूमत ,ये नहीं मालूम उसको ,
आसमानों से गिरेगा ,ये नहीं मालूम उसको,
किन्तु उनको लांघने की ,जिद यहाँ क्यों कर रहा है,
एक कतरा जिन्दगी का,क्यों हवा में उड़ रहा है,

शनिवार, 4 जून 2011

एक कतरा जिन्दगी का क्यों हवा में उड़ रहा है ,
खो गया है जो यहाँ पर ,यार बापस चाहता है,
कह सके अपना जिसे वो,प्यार बापस चाहता है,
क्यों हजारों गर्दिशों में ,बेतहाशा घिर रहा है ,