आसमाँ को क्या खबर है जिन्दगी किसने लिखी है ,
छू लिया जिसने उसे बस, जिन्दगी उसने लिखी है ,
आदमी जो चाहता है ,वो उसे मिलता नहीं है ,
किन्तु उसने मौत पर जिन्दादिली अपनी लिखी है ,
कुछ लम्हों का खेल है यह ,दृष्टि इसकी है अपरिमित ,
कर रही है युग -युगों से इस जगत के कण विनिर्मित ,
जो यहाँ आगे बदा है ,कारवाँ उससे चला है ,
वो अगर चाहे तो करदे ,कल्पनाओं को सजीवित ,
पूछते क्यों लोग मुझसे ,जिन्दगी किसने लिखी है
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