geeton ke badal-[4]
बुधवार, 11 मई 2011
करवटें गुमसुम पड़ी हैं, रिक्त आलिंगन पड़े हैं,शोखियों के वो मचलते ,मुक्त कटिबंधन पड़े हैं ,क्यों फिजा में रात- रानी ,इस तरह घुलने लगी है ,आपके कितने अपरिमित, सिक्त अभिसिंचन पड़े हैं ,हो सके तो आज उनका मौन हाहाकार सुन लो /
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