नहीं संभला ,नहीं संभला ,
संभाले से नहीं संभला ,
तुम्हारे ख्याल में डूबा ,
हमारा दिल नहीं संभला ,
कभी ये ओस में भीगा ,
कभी ये भाप में बदला ,
धुंए के बादलों में भी ,
लिपट कर ये यहाँ निकला ,
तुम्हारी बात जब भी ये ,
यहाँ सुनता किसी से है ,
कभी ये मोम -सा पिघला ,
कभी ये बर्फ पर फिसला,
कभी तुम भी दिखाई दीं,
कभी वो चाँद भी निकला
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