geeton ke badal-[4]
रविवार, 17 अप्रैल 2011
मखमली एहसास उभरे,क्यों छलकते ख्वाव उभरे, झील की अंगड़ाईयों में ,वासनायें घुल रहीं हैं , दूर तक कोई नहीं है,दूंदने से क्या मिलेगा , क्यों सदाओं में अभी तक ,वो अदायें घुल रहीं हैं,
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें