बुधवार, 13 अप्रैल 2011

शबनम की बूँदें जब बरसीं, फूलों ने ले ली अँगड़ाई, नदिया की बूँदें जब छलकीं ,कूलों पर छाई तरुणाई , सागर की बूँदें जब उफनी ,मेघों में सावन लहराया, लेकिन आँसू की बूँदों में ,कोई शोर नजर ना आया,

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