सोमवार, 11 अप्रैल 2011

तितलियाँ उड़ने लगीं फिर, कोकिलें गाने लगीं फिर , पंछियों की चिर- उड़ानें ,सामने आने लगीं फिर, डालियों ने झूमती -सी, भावनायें जब दिखाईं , धूप ने किरनें समेटीं , बदलियाँ छाने लगीं फिर ,

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