geeton ke badal-[4]
सोमवार, 25 अप्रैल 2011
इस सुबह की हलचलों में,
हर तरफ नगमे छिड़े थे,
कंगनों की खनखनाहट,
पक्षियों के स्वर भरे थे,
मंद झोंकों में पवन के,
ताजगी लहरा रही थी,
कर्म पथ पर, कर्म योगी ,
कूच करने चल पड़े थे,
मैं बिभोरित हो चुका था ,
पाँव मैंने भी बदाया ,
यह सुबह जब.......
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